Kargil Vijay Diwas 2017: कोलकाता के एकमात्र जांबाज कानद ने ढेर की थी नापाक कोशिश

कोलकाता:शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।ज् मई और जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के कारगिल में पाकिस्तानी सेना और कश्मीरी उग्रवादियों की ओर से नियंत्रण रेखा पार कर भारत की जमीन पर कब्जा करने की नापाक कोशिश को नाकाम करने वाले कोलकाता के पहले शहीद लेफ्टिनेंट कानद भट्टाचार्य की शहादत को यह पंक्ति चरितार्थ साबित करती है। सिटी ऑफ ज्वॉय के बीटी रोड पर बनहुगली के समीप बरानगर निवासी महज २२ साल के इस जांबाज ने अंतिम सांस तक दुश्मनों से लोहा लेते हुए अदम्य वीरता और साहस का परिचय दिया था।
टाइगर हिल पर जोश, जज्बा और जुनून का परिचय देकर देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले इस जांबाज को भारत सरकार ने मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया। 8वीं सिक्ख रेजिमेंट के तहत सेवाएं दे चुके एसएस-३७८१८एम के लेफ्टिनेंट कानद ने टाइगर हिल पर भारतीय सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व किया था। लेह-बाटलिक रोड पर बातनिक के समीप भारतीय वायुसेना ने ०४ जुलाई, १९९९ को ऑपरेशन विजय के जरिए हवाई हमलों की शुरुआत की थी। इससे पहले लेफ्टिनेंट कानद की अगुवाई में ८ अन्य रैंकों की गश्ती सैन्य टुकड़ी को टाइगर हिल के पास उत्तर-पूर्वी रेंज पर एक मोर्चा स्थापित करने का जिम्मा सौंपा गया था।
चारों ओर बर्फ से ढके इस इलाके तक पहुंचने के दौरान लेफ्टिनेंट कानद और पाकिस्तानी घुसपैठियों के बीच भीषण गोलाबारी हुई। सिपाही मेजर सिंह के साथ दुश्मनों की नापाक कोशिश को नाकाम करने के लिए आगे बढऩे के दौरान लेफ्टिनेंट कानद की तीक्ष्ण नजर ऑटोमैटिक राइफलों व गोला-बारूद से लैस पाक घुसपैठियों पर पड़ी। इसके बाद कानद ने फौरन मोर्चा लेते हुए गश्ती टुकड़ी को 2 भागों में बांटकर सतर्क किया और मोर्चा संभाला। साथी सैनिकों की संख्या कम होने के बावजूद उन्होंने अदम्य बहादुरी और दिलेरी का परिचय देते हुए घायल होने पर भी कई घंटों तक दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। बुरी तरह जख्मी होने के बावजूद लेफ्टिनेंट कानद ने अंतिम सांस लेने तक दुश्मनों को टाइगर हिल पर आगे नहीं बढऩे दिया।
बाद में जब मदद के लिए अतिरिक्त टुकड़ी मौके पर पहुंची, तो उनका कोई सुराग नहीं मिला और आखिरकार 21 मई, 1999 को उन्हें लापता घोषित कर दिया गया। 15 जुलाई, 1999 को टाइगर हिल पर कब्जे के बाद उन्हें बर्फ में दफन पाया गया। लेफ्टिनेंट कानद का पार्थिव शरीर कोलकाता स्थित सेना की पूर्वी कमान के मुख्यालय फोर्ट विलियम के पूर्वी कमान स्टेडियम लाया गया। सेना, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न दलों के नेताओं और काफी तादाद में महानगर वासियों ने इस जांबाज को अंतिम सलामी दी।
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